जोड़ों एवं घुटनों के दर्द के लिए एकमात्र उपाय

जोड़ यानी joints शरीर के ऐसे हिस्से होते हैं जहाँ दो या दो से ज्यादा हड्डियाँ मिलती हैं जैसे घुटने, कमर, गर्दन, कंधे आदि।

जोड़ों का दर्द क्या है? 

जोड़ों का दर्द (Joint pain) से तात्पर्य शरीर के किसी अंग के जोड़ में खिंचाव, दर्द, अकड़न इत्यादि होना है।

हालांकि, इसका इलाज सामान्य घरेलू नुस्खे के द्वारा किया जा सकता है, लेकिन यदि यह समस्या लंबे समय तक वैसी ही बने रहे, तो फिर इसका इलाज करने का एकमात्र विकल्प जोड़ों को बदलना ही होता है।

जोड़ों का दर्द के लक्षण क्या हैं?

जोड़ों का दर्द की शुरूआत सामान्य दर्द से होती है, इसलिए कुछ लोग इसकी गंभीरता को समझ नहीं पाते हैं।
अत: यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर में ये 5 लक्षण नज़र आए तो उसे इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ये जोड़ों का दर्द के संकेत होते हैं-

  1. चलने में परेशानी होना- जोड़ों का दर्द का प्रमुख लक्षण चलने में परेशानी होना है।
    ऐसा मुख्य रूप से तब होता है, जब घुटनों के जोड़ों में दर्द होता है, ऐसी स्थिति में इससे पीड़ित लोगों को उठने-बैठने में भी परेशानी होती है।
  2. जोड़ों में सूजन होना- जोड़ों का दर्द का अन्य लक्षण जोड़ों में सूजन होना या आना है।
    ऐसी स्थिति में सिकाई करना काफी नहीं होता है बल्कि मेडिकल सहायता लेनी पड़ती है।
  3. जोड़ों में नरमी होना- यदि किसी व्यक्ति को जोड़ों में नरमी महसूस होती है, तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि यह जोड़ों का दर्द का संकेत हो सकता है।
  4. जोड़ों में अकड़न महसूस होना- अक्सर, कुछ लोगों को अपने जोड़ों में अकड़न महसूस होती है।
    ऐसे लोगों को तुरंत डॉक्टर से मिलकर उनकी जांच करानी चाहिए क्योंकि यह जोड़ों का दर्द का लक्षण हो सकता है।
  5. जोड़ों में लालपन होना- अचानक से जोड़ों में लालपन होना भी जोड़ों का दर्द का लक्षण हो सकता है।
    ऐसी स्थिति तुरंत मेडिकल सहायता लेना ही समझदार भरा कदम हो सकता है।

जोड़ों का दर्द की पहचान कैसे की जा सकती है? 

यदि जोड़ों का दर्द की पहचान समय रहते कर ली जाए तो इसका इलाज सही तरीके से किया जा सकता है।
ऐसा करने से इससे पीड़ित लोगों की परेशानियाँ थोड़ी कम हो सकती है, जिससे उनकी ज़िदगी बेहतर बन सकती है।

  1. मेडिकल हिस्ट्री की जांच करना- जोड़ों का दर्द की पहचान करने का सबसे आसान तरीका मेडिकल हिस्ट्री की जांच करना है।
  2. एक्स-रे करना- चूंकि, जोड़ों का दर्द अंदरूनी कारण जैसे जोड़ों के बीच में अंतर आना का भी नतीजा होता है, इसलिए डॉक्टर इस बात की पुष्टि करने के लिए एक्स-रे का सहारा लेते हैं।
  3. ब्लड टेस्ट कराना- अक्सर, डॉक्टर इस समस्या की पहचान करने के लिए ब्लड टेस्ट भी करते हैं ताकि लोगों के शरीर की अंदरूनी स्थिति को मॉनिटर किया जा सके।
  4. सेडीमेंटशन टेस्ट कराना- वर्तमान समय में जोड़ों के दर्द का पता लगाने के लिए सेडीमेंटशन टेस्ट (sendimention test) का भी सहारा लिया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से ब्लड सेल्स काउंट किया जाता है।

जोड़ों का दर्द का इलाज कैसे करें?

जैसे ही किसी व्यक्ति के जोड़ों का दर्द से पीड़ित होने का पता चलता है, वैसे ही उसका इलाज शुरू कर देना चाहिए।
जोड़ों का दर्द का इलाज निम्नलिखित तरीके से संभव है-

  • एक्सराइज़ करना- जोड़ों का दर्द का इलाज करने का सबसे आसान तरीका एक्सराइज़ करना है।
    एक्सराइज़ करने से जोड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे उसमें होने वाला दर्द कम होता है।
  • दवाई देना- जोड़ों का दर्द का इलाज दवाई के द्वारा भी किया जाता है।
    ये दवाइयाँ इस दर्द को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ इसे ठीक भी करती हैं।
  • योगा करना- इस समस्या को योगा के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है।
    ऐसी स्थिति में प्राणायम,सेतुबंधासन, शवआसन इत्यादि करना लाभकारी साबित हो सकता है।
  • ऑपरेशन कराना- जब जोड़ों का दर्द से पीड़ित व्यक्ति को इलाज के किसी भी तरीके से आराम नहीं मिलता है, तो उसके लिए घुटनों का ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प बचता है।
    इसके अलावा, शरीर के अन्य जोड़ों के लिए आर्थ्रोप्लास्टी (Arthroplasty) नामक सर्जरी की जा सकती है।

जोड़ों का दर्द के संभावित खतरे क्या हो सकते हैं?

हालांकि, जोड़ों का दर्द का इलाज संभव है, जिससे करवाकर लोग बेहतर ज़िदगी जी सकते हैं।
इसके बावजूद, यह काफी दुख की बात है कि कुछ लोग इसका लाभ सही समय पर नहीं उठा पाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इन 5 संभावित खतरे से जूझना पड़ सकता है-

  1. दर्द का बढ़ना- जोड़ों का दर्द का इलाज लंबे समय तक न कराने पर यह समय बीतने के साथ-साथ बढ़ सकता है।
    ऐसी स्थिति में इससे पीड़ित लोगों को असहनीय दर्द से जूझना पड़ सकता है, जिसमें दर्दनिवारक दवाई से भी आराम नहीं मिलता है।
  2. दर्द वाले अंग का खराब होना- यदि जोड़ों का दर्द को ठीक न किया जाए तो इसका असर उस अंग पर पड़ता है, जहां पर यह दर्द होता है।
  3. दिल या किडनी जैसी गंभीर बीमारियों की संभावना का बढ़ना- जोड़ों का दर्द के संभावित खतरों में गंभीर बीमारियों के खतरे का बढ़ना है।
    इसी कारण, इसकी वजह से इससे पीड़ित लोगों को दिल या किडनी संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।
  4. सामान्य काम करने में भी परेशानी होना- अक्सर, ऐसा देखा गया है कि इस समस्या से पीड़ित लोगों को सामान्य काम जैसे झुककर कोई चीज़ उठाना, ज़मीन पर बैठना, ज्यादातर देर तक घुटने मोड़कर बैठना इत्यादि को करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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